स्टॉक एक्सचेंज की इंटरऑपरेबिलिटी आपकी इक्विटी और एफ एंड ओ ट्रेडिंग को कैसे प्रभावित करती है?



सेबी (SEBI-Securities Exchange Board of India) समय-समय पर नए नियमों के साथ आता है ताकि शेयर बाजार (Stock Market) के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित किया जा सके। वर्ष २०१९ में, SEBI ने इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) की शुरुआत की है। सरल शब्दों में इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) का अर्थ है एक दूसरे के सहयोग से काम करना। हमारे एक ब्लॉग में, आपने स्टॉक मार्केट प्रतिभागियों के बारे में जानकारी प्राप्त की है। स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) और क्लियरिंग कॉरपोरेशन (Clearing Corporation) उनमें से कुछ प्रतिभागी हैं। क्लियरिंग कॉरपोरेशन स्टॉक एक्सचेंज और व्यापारी के बीच एक मध्यस्थ के रूप में कार्य करते हैं। ट्रेडों को स्टॉक एक्सचेंज में निष्पादित (Execute) किया जाता है और संबंधित क्लियरिंग कॉरपोरेशन में सेटल किया जाता है। ट्रेड के सेटलमेंट (Settlement) के लिए प्रत्येक स्टॉक एक्सचेंज का अपना क्लियरिंग कॉरपोरेशन (Clearing Corporation) होता है। इंटरऑपरेबिलिटी के वजह से एक एक्सचेंज पर खरीदे गए ट्रेडों को दूसरे स्टॉक एक्सचेंज के क्लियरिंगहाउस (Clearing House) में सेटल किया जा सकता है, अगर किसी स्टॉक एक्सचेंज के क्लियरिंगहाउस में कोई समस्या आती है। इस ब्लॉग में, हमने आपके सभी सवालों के जवाब दिए हैं जैसे इंटरऑपरेबिलिटी क्या है (What is Interoperability Hindi), इंटरऑपरेबिलिटी के क्या फायदे हैं? (What are the benefits of interoperability Hindi?), इंटरऑपरेबिलिटी के नियम क्या हैं? (What are the regulations of interoperability?) कुल मिलाकर यह ब्लॉग आपको इंटरऑपरेबिलिटी के बारे में पूरी जानकारी लेने में पर्याप्त है।


शेयर बाजार और क्लियरिंग कॉरपोरेशन सहयोग में कैसे काम करते हैं?

भारतीय शेयर बाजार में मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया के साथ दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) और BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) हैं। BSE और NSE में विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियों (Securities) में ट्रेडिंग होती है, जिसमें स्टॉक (Stock), डेरिवेटिव (Derivative) और करेंसी (Currency) शामिल हैं। इन ट्रेडों के सेटलमेंट के लिए, प्रत्येक स्टॉक एक्सचेंज का अपना अलग क्लियरिंग कॉरपोरेशन होता है।


इंटरऑपरेबिलिटी क्या है? (What is Interoperability Hindi?)

इंटरऑपरेबिलिटी का पारीभाषिक अर्थ यह है की एक या एक से अधिक सिस्टम्स जिनके इंटरफेस को अन्य उत्पादों के सिस्टम के साथ सहयोग में काम करने के लिए बनाया गया है। यही अवधारणा शेयर बाजार में इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) पर लागू होती है।


शेयर बाजार में इंटरऑपरेबिलिटी क्या है? (Interoperability in Share Market)

वर्ष २०१९ में SEBI ने इंटरऑपरेबिलिटी की शुरुआत की है। शेयर बाजार के संदर्भ में इंटरऑपरेबिलिटी का मतलब एक ऐसी प्रणाली है जहां किसी भी एक्सचेंज-बीएसई (BSE), एनएसई (NSE), या एमएसईआई (MSEI) पर निष्पादित (Executed) ट्रेडों को किसी भी क्लियरिंग कॉरपोरेशन के माध्यम से सेटल किया जाता है और जरूरी नहीं कि सेटलमेंट उसी स्टॉक एक्सचेंज के क्लियरिंग कॉरपोरेशन तक ही सीमित हो जिसमे से ट्रेड हुआ है। इसका मतलब है कि एनएसई (NSE) पर किया गया ट्रेड बीएसई (BSE) के क्लीयरिंग कारपोरेशन पे या इसके विपरीत के माध्यम से सेटल किया जा सकता है। यह निष्पादन जोखिम (Execution Risk) को सेटलमेंट जोखिम (Settlement Risk) से अलग करके जोखिम मुक्त प्रोसेस को सुनिश्चित करता है। इंटरऑपरेबिलिटी (Interoprability) निष्पादित करने के लिए विभिन्न स्टॉक एक्सचेंज और उनके क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन्स एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।


निवेशकों को इंटरऑपरेबिलिटी के क्या लाभ हैं?

पूंजी बाजार (Capital Market) की इकोसिस्टम में इंटरऑपरेबिलिटी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बहुत सारे लाभ लाने में मदद करती है जैसे,

  • कम ट्रेडिंग लागत

  • अच्छी कार्य क्षमता

  • प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण

  • पूंजी का बेहतर उपयोग

  • किसी भी क्लीयरिंग कारपोरेशन में गड़बड़ी के दौरान सेटलमेंट में निरंतरता

आइए कुछ फायदों को विस्तार से समझते हैं,


कम ट्रेडिंग लागत

सारे प्रमुख ब्रोकर दोनों स्टॉक एक्सचेंज (NSE and BSE) के सदस्य हैं और उनके क्लियरिंग कॉरपोरेशन के सदस्य भी हैं। इस वजह से, उन्हें दोनों क्लीयरिंग कारपोरेशन में अलग-अलग मार्जिन स्थिति बनाए रखनी होती हैं। लेकिन इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) के कार्यान्वयन के साथ ब्रोकर अपने मार्जिन और कोलेटरल को एक ही क्लियरिंगहाउस (Clearinghouse) में सेटल कर सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप पूंजी का बेहतर उपयोग होता है, जो बदले में, कम व्यापारिक लागत का कारण बन सकता है। क्लीयरिंग कारपोरेशन के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है जो फिर से व्यापारों को क्लीयरिंग की कम लागत के संदर्भ में प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण की ओर ले जाती है।


ट्रेडर्स कैलेंडर स्प्रेड स्ट्रैटेजी निष्पादित कर सकते हैं

ट्रेडर्स एक्सचेंजों के बीच निकट और दूर-महीने (Close and Far Month) के कॉन्ट्रैक्ट्स के बीच कैलेंडर-स्प्रेड मार्जिन निष्पादित कर सकते हैं। यह एक निवेशक के लिए एक्सचेंजों में विभिन्न उपकरणों में व्यापार करने का अवसर देता है।


तकनीकी गड़बड़ियों से पूंजी की सुरक्षा

इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) बाजार सहभागियों (Market Participants) को किसी विशेष एक्सचेंज या उसके क्लियरिंग प्लेटफॉर्म में होने वाली गड़बड़ियों से बचाती है। यह बाजार सहभागियों को निष्पादन जोखिम (Execution Risk) को निपटान जोखिम (Settlement Risk) से अलग करके स्टॉक एक्सचेंज में गड़बड़ी के मामले में अपनी पोजीशन को बंद करने की अनुमति देता है।


इंटरऑपरेबिलिटी का क्या महत्व है?

शेयर बाजार में प्रति सेकेंड हजारों लेन-देन जैसे की खरीद-बिक्री (Buy /Sell) और व्यापार का निपटान (Settlement) आदि होते है। बाजार में लोगों का पैसा लगा हुआ होता है। थोड़ी देर के लिए कल्पना करें अगर एनएसई (NSE) में कोई भी प्रक्रिया रुक जाती है या थोड़ी देर के लिए भी गड़बड़ी का सामना करना पड़ता है तो क्या होगा? इस तरह के किसी भी गड़बड़ी से निवेशकों को भारी नुकसान हो सकता है, इन परिस्थितियों का जोखिम मिटाने के लिए सेबी (SEBI) ने इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) की शुरुआत की है।


इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) एक सुचारू और नियमित संचालन सुनिश्चित करती है यदि कोई विशेष स्टॉक एक्सचेंज या क्लियरिंग कॉरपोरेशन (Clearing Corporation) किसी भी प्रकार के गड़बड़ी का सामना करता है।


एनएसई (NSE) पर पिछली बार हुई ट्रेडिंग में गड़बड़ी का उदाहरण लें, जहां एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के कैश और फ्यूचर बाजार सुबह बंद हो गए थे। बेंचमार्क इंडेक्स - एनएसई निफ्टी और बैंक निफ्टी - कैश बाजार दरों को अपडेट करने में सक्षम नहीं थे। उस दिन एनएसई (NSE) दोपहर 3.30 बजे खुला और शाम 5 बजे बंद हुआ। जब एनएसई (NSE) में यह हो रहा था और एनएसई पर ट्रेडिंग पूरी तरह से ठप हो गई, बीएसई पर सामान्य ट्रेडिंग हो रही थी, और ट्रेडों को बीएसई (BSE) के क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के माध्यम से भी क्लियर किया जा रहा था।

भले ही एनएसई (National Stock Exchange) कार्यात्मक था और केवल उसका क्लियरिंगहाउस प्रभावित था, एनएसई (NSE) पर किए गए ट्रेडों के इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) सेटलमेंट के अस्तित्व के कारण बीएसई (BSE) का क्लियरिंगहाउस पूरी तरह कार्यात्मक होने के कारण प्रभावित नहीं हुआ।

इससे आप इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) के महत्व को समझ गए होंगे। किसी भी परिस्थिति में, यदि क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन (Clearing Corporation) में से किसी एक को किसी भी प्रकार के व्यवधान का सामना करना पड़ता है, तो सभी क्लीयरिंग गतिविधियों को बिना किसी समस्या के दूसरी क्लीयरिंग इकाई में बदल दिया जा सकता है, यदि इंटरऑपरेबिलिटी पूरी तरह कार्यात्मक है।


इंटरऑपरेबिलिटी के नियम क्या हैं?

  • किसी अन्य ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए एक बाजार सहभागी (Market Participant) को संबंधित संस्थाओं के दूसरे समूह की सदस्यता लेने की आवश्यकता होती है।

  • इंटरऑपरेबल लिंक के कारण होने वाली किसी भी टकराव या समस्या के लिए कुशल और समय पर समाधान की आवश्यकता होगी। इस तरह के इंटरऑपरेबल लिंक से उत्पन्न होने वाले मुद्दों के सुचारू, निष्पक्ष और पारदर्शी समाधान को सुनिश्चित करने के लिए एक शक्तिशाली विवाद समाधान तंत्र को लागू करने की आवश्यकता है।

  • स्टॉक एक्सचेंज और एक क्लीयरिंग कारपोरेशन के बीच समझौता। इंटरऑपरेबिलिटी की अवधारणा ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन और कई क्लीयरिंग कारपोरेशन के बीच एक बहु-पक्षीय समझौते की अपेक्षा करती है। ट्रेडिंग वेन्यू और मल्टीपल क्लियरिंग वेन्यू के बीच इस बहु-पक्षीय समझौते के लिए कानूनी आधार प्रदान करने के लिए, यह आवश्यक है कि प्रतिभूति बाजार (Security Market) को नियंत्रित करने वाला कानूनी ढांचा ऐसी लिंक व्यवस्थाओं को मान्यता देता है और उनका समर्थन करता है।

  • SECC का विनियमन 37 स्टॉक एक्सचेंजों और कई क्लीयरिंग कॉर्पोरेशंस के बीच एक बहुपक्षीय समझौते का समर्थन नहीं करता है, लेकिन स्टॉक एक्सचेंज और एक क्लीयरिंग कारपोरेशन के बीच लिंक की व्यवस्था की अनुमति देता है। हालांकि, स्टॉक एक्सचेंजों और कई क्लीयरिंग कॉर्पोरेशंस के बीच बहु-पक्षीय समझौते की पहचान करने और समर्थन करने के लिए, SECC विनियमों के विनियम 37(1) के लिए एक शर्त सम्मिलित करने का प्रस्ताव है।

  • उपरोक्त विनियम सेबी (SEBI) के इंटरऑपरेबिलिटी विनियमन दस्तावेज के संदर्भ में हैं।

इस तरह आप समझ गए होंगे कि शेयर बाजार में इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) क्या है और यह आपकी ट्रेडिंग को कैसे प्रभावित करती है। शेयर बाजार में इंटरऑपरेबिलिटी की शुरूआत ने तकनीकी गड़बड़ियों और व्यवधानों के परिदृश्य में व्यापारी को एक आश्वासन दिया है। इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) बाजार सहभागियों को एक्सिक्यूशन जोखिम से सेट्लमेंट जोखिम को अलग करके स्टॉक एक्सचेंज में गड़बड़ी के मामले में अपनी स्थिति को समाप्त करने की अनुमति देता है।


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