इन महत्वपूर्ण स्टेप्स को जाने बिना सही ऑपशन्स स्ट्रेटेजी को उपयोग मे ना लाये!



फ्यूचर्स और ऑप्शंस (Futures and Options) शेयर बाजार (Share Market) में ट्रेड किए जाने वाले प्रमुख प्रकार के स्टॉक डेरिवेटिव (Stock Derivatives) हैं। ऑप्शंस व्यापारी ऑप्शन रणनीतियों (Options Strategies) और इसके लाभों से बहुत अच्छी तरह वाकिफ है। ऑप्शंस में प्रत्येक ट्रेडर के लिए कई रणनीतियां पहले से ही मौजूद हैं जैसे की स्टॉक ऑप्शंस स्ट्रैटेजी, इंडेक्स ऑप्शंस (Index Option) स्ट्रैटेजी, साथ ही ग्रीक्स (Greeks) ऑप्शन स्ट्रैटेजी आपको ऑप्शन या ऑप्शन स्ट्रैटेजी के सैद्धांतिक जोखिम को विभिन्न जोखिमों के लिए मापने का एक तरीका प्रदान करती हैं। केवल एक ऑप्शन की खरीद या बिक्री (Buy or Sell) यह एक बहुत ही सीधी रणनीति हो सकती है। हालाँकि,ऑप्शन की रणनीतियाँ अक्सर ऑप्शंस की एक साथ खरीद या बिक्री के संयोजन को संदर्भित करती हैं।


ऑप्शन ट्रेडिंग (Options Trading) कई तरह से की जा सकती है। ऑप्शंस के साथ हेजिंग (Hedging), स्पेकुलेशन (Speculation) और आर्बिट्रेज (Arbitrage ) सभी संभव हैं। हमने इस ब्लॉग मे ऑप्शंस ट्रेडिंग (Options Trading) की स्ट्रेटेजीज को लागू करने पहले कोनसी स्टेप्स आपको लेनी चाहिए इसके के बारे मे हिन्दी मे चर्चा की है। (Steps Before Executing Option Strategy In Hindi)।ऑप्शंस व्यापारियों के बीच लोकप्रिय ऑप्शन ट्रेडिंग रणनीतियों को समझें। इन रणनीतियों को निष्पादित करने के लिए आप आगे दी गयी स्टेप्स का अनुसरण कर सकते है।


ऑप्शन ट्रेडिंग शुरू करने के लिए आपको यह चिजे करनी होगी

  • ऑप्शन ट्रेडिंग खाता खोलना।

  • ऑप्शंस को खरीदने या बेचने के ऑप्शन चुनना।

  • ऑप्शंस की स्ट्राइक प्राइस (Strike Price) भविष्य मे कितनी होती है इसका अनुमान लगाना।

  • ऑप्शन के टाइम फ्रेम को निर्धारित करना।

ऑप्शंस ट्रेडिंग की स्टेप्स (Steps in Options Trading)

दिशात्मक स्पेकुलेशन (Directional Speculation) के लिए विकल्पों की ट्रेडिंग प्रक्रिया में आउटलुक (Outlook), प्लानिंग (Planning), एंट्री (Entry) और एक्ज़िट (Exit) यह चार आवश्यक चरण हैं। विभिन्न ऑप्शन स्प्रेड स्ट्रेटजी (Option Spread Strategy) का उपयोग करते हुए, दिशात्मक (Directional) स्पेकुलेशन में अंडरलाईंग एसेट पर ऊपर, नीचे, तटस्थ, या अस्थिर (Upward, Downward, Neutral or Volatile) दृष्टिकोण से लाभ शामिल होता है।


स्टेप १: आउटलुक (Outlook)

एक विशिष्ट ऑप्शन रणनीति में कम से कम २-३ अलग-अलग ऑप्शंस की खरीद / बिक्री (Buying/Selling) शामिल होती है (विभिन्न स्ट्राइक और / या समाप्ति के समय के साथ)। ऑप्शन रणनीति को निष्पादित करने के लिए निश्चित ऑप्शन रणनीति के व्यवहार का विश्लेषण करना और उसे समजना जरूरी है। उसके के लिए लाभ/हानि (Profit/Loss) के ग्राफ को निकालना बहुत ही जरूरी है।


इस ग्राफ से कोई स्टॉक ऊपर या नीचे बढ़ रहा है या नहीं इसका पता चलता है । ऑप्शन ट्रेडिंग में, हालांकि, आपका दृष्टिकोण जितना अधिक विशिष्ट होगा उतनाही आप एक ऑप्शन रणनीति (Strategy) को बेहतर ढंग से लागू करने में सक्षम होंगे जो उस अद्वितीय दृष्टिकोण से मेल खाती है, जिसके परिणामस्वरूप निवेश पर अधिक लाभ होता है।


ऑप्शंस ट्रेडिंग में, आउटलुक बनाने के लिए तीन प्रमुख घटक होते हैं।

दिशा(Direction), मूल्य लक्ष्य(Price target) और समय अवधि (Time Span)


दिशा (Direction)

आप ऑप्शन ट्रेडिंग में न केवल ऊपर या नीचे की ओर बढ़ने से कमा सकते हैं, बल्कि आप एक ही समय में साइड वे से और कई दिशाओं से भी कमा सकते हैं। निवेशक (Investors) बाजार की दिशा पर दांव लगाकर पैसा कमाने की दिशा पर नजर रख सकते हैं। ऑप्शंस ट्रेडिंग के दौरान आपका दृष्टिकोण जितना सटीक होगा, निवेश पर आपका रिटर्न उतना ही बेहतर होगा।


मूल्य लक्ष्य (Price target)

एक मूल्य उद्देश्य (Price Target) आपको उस पॉइंट को समझने मे मदत करता है जिस पर स्टॉक बेचने से आपको लाभ होगा। ऑप्शन ट्रेडिंग में, यदि आपके पास उचित मूल्य लक्ष्य (Price Target) है तो इसका मतलब है कि आपके पास लाभ कमाने का एक बेहतर मौका है। एक कहावत है की, ऑप्शन का व्यापार करते समय मूल्य उद्देश्य होना आवश्यक नहीं है, लेकिन यदि आप ऐसा करते हैं, तो आप एक बड़ा लाभ अर्जित करने में सक्षम होंगे।


समय अवधि (Time Span)

ऑप्शन ट्रेडिंग और स्टॉक (Stock) के बीच मुख्य अंतर एक्स्पायरी (Expiry) का है। ऑप्शंस मे समाप्ति तिथियां (Expiry Dates) निर्धारित होती हैं, लेकिन इक्विटी (Equity) को अनिश्चित काल तक रखा जा सकता है। चूंकि ऑप्शंस में से चुनने के लिए समाप्ति तिथियां और विभिन्न प्रकार की समाप्ति तिथियां निर्धारित की गई हैं, इसलिए यदि आप जानते हैं कि स्टॉक को आपके मूल्य उद्देश्य तक पहुंचने में कितना समय लगेगा, तो आप आवश्यकता से अधिक समाप्ति तिथियों के साथ अधिक महंगे ऑप्शन खरीदने से बचकर निवेश पर अपने लाभ को अधिकतम कर सकते हैं।


जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरणों से देख सकते हैं, जब आपका दृष्टिकोण सटीक होता है , तो ऑप्शंस ट्रेडिंग में आपको बेहतर रिटर्न मिलेगा।


स्टेप २: योजना (Planning)

कौन सी विकल्प रणनीति (Option Strategy) और कितना पैसा उपयोग करना है यह सब ट्रेडिंग की योजना यह सब प्लानिंग मे शामिल होता है।


नियोजन (planning) चरण में दो मुख्य घटक होते हैं।

विकल्प रणनीति (Choice of Options Strategy) और पूंजी प्रतिबद्धता (Capital Commitment)।


ऑप्शन रणनीति का विकल्प (Choice of Options Strategy)

ऑप्शंस का उपयोग करके सैकड़ों संभावित संयोजन (Combination) हो सकते हैं। सभी ऑप्शन रणनीतियाँ विशिष्ट दृष्टिकोण प्रदान करती हैं, यही कारण है कि दृष्टिकोण चरण इतना महत्वपूर्ण है। सक्षम ऑप्शन रणनीतियों में से एक चुनने के लिए स्पष्ट और विशिष्ट दृष्टिकोण बहुत आवश्यक है।


आपके द्वारा चुनी गई ऑप्शन रणनीति भी आपकी समझ और विशेषज्ञता द्वारा नियंत्रित होनी चाहिए। सभी ऑप्शन रणनीतियों (Strategies) को पेपर ट्रेडिंग के माध्यम से अभ्यास करना चाहिए और उन्हें वास्तविकता मे लागू करने से पहले अच्छी तरह से समझना चाहिए।


पूंजी प्रतिबद्धता (Capital Commitment)

ऑप्शन स्ट्रेटजी लागू करने से पहले आप ज्यादा से ज्यादा कितना नुकसान सहन कर सकते है यह निश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है। यह ऑप्शन रणनीति का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है। यह वह पूंजी है जिसे आप व्यापार करने के लिए तैयार हैं।


स्टेप ३: प्रवेश (Entry)

यदि आप बुल कॉल स्प्रेड (Bull Call Spread) जैसे मल्टी-लेग ऑप्शंस स्ट्रैटेजी (Multi leg Option Strategy) का उपयोग कर रहे हैं, तो अधिकांश ब्रोकर आपको पोजीशन में शामिल सभी ऑप्शंस के साथ ऑर्डर फॉर्म भरकर इसे एक साथ एक ऑर्डर के रूप में रखने की अनुमति देंगे या फिर आप पोजीशन में शामिल प्रत्येक ऑप्शन पर प्रवेश करने के लिए पोजीशन का सिंगल " लेग " (Leg) लेना चुन सकते हैं । लेग (Leg) लेने के लिए अनुभव होना जरूरी है और यदि यह अनुचित तरीके से किया जाता है, तो पोजीशन के संभावित लाभ को समाप्त कर सकता है, इसलिए, सुनिश्चित करें कि वास्तविकता मे कुछ करने से पहले अपने वर्चुअल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर लेगिंग (Legging) का अभ्यास करें।


आपके द्वारा पोजीशन में प्रवेश करने के बाद, आपको स्टॉक मूल्य या ऑप्शन मूल्य के आधार पर अपने दृष्टिकोण के अनुसार अपनी पोजीशन के लिए स्टॉप लॉस पॉइंट (Stop Loss Point) भी सेट करना चाहिए। यदि आप केवल पैसे (Cash) के साथ व्यापार कर रहे हैं जिसे आप खोने का जोखिम उठा सकते हैं और पूर्ण नुकसान की संभावना को पूरा करने के लिए इच्छुक हैं, तो आप स्टॉप लॉस पॉइंट के बिना जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि मैं १०,००० रुपये के फंड में से १००० रुपये प्रति ट्रेड से अधिक नहीं खोना चाहता, तो मैं केवल १०० रुपये के साथ ऑप्शन खरीदूंगा और स्थिति को लाभ या पूर्ण हानि तक चलने दूंगा।


स्टेप ४: बाहर निकलें (Exit)

आखिरकार, सभी ऑप्शंस की पोजीशन को ४ तरीकों में से किसी एक से बाहर करना होगा; एक्सरसाइज़(Exercise), असाइनमेंट (Assignment), रोल फॉरवर्ड (Roll Forward) या क्लोज (Close)।

  • एक्सरसाइज़ (Exercise) का अर्थ है, अंडरलायींग स्टॉक को स्वेच्छा से खरीदने या कम करने के अपने अधिकार का प्रयोग करना। यदि आप अंततः लंबी अवधि के लिए अंडरलायींग स्टॉक (Underlying Stock) पर सीधे पोजीशन लेने का निर्णय लेते हैं।

  • असाइनमेंट (Assignment) का मतलब है, जो भी ऑप्शंस आपने शॉर्ट किए थे वो एक्सर्साइज़ होते है और आपके पास अंडरलायींग स्टॉक में एक पोजीशन बचती है ।

  • रोल ओवर (Roll Over) का अर्थ है, निवेशित बने रहने के लिए अपने समाप्त होने वाले ऑप्शंस को बंद करना और फिरसे आगे के महीनों के लिए ऑप्शंस लेना।

  • क्लोज(Close) का मतलब लॉन्ग ऑप्शन (Long Option) पोजीशन जिसे आप होल्ड करते हैं उसको बेचना है या शॉर्ट ऑप्शन को बंद करने के लिए खरीदना हैं।

ऑप्शंस (Options) के बारे मे रिसर्च से आपको संभावित अच्छे ऑप्शन निवेशों को पहचानने में और ट्रेडिंग आइडियास (Ideas) जैसे की पूर्व-निर्धारित स्क्रीन, विश्लेषण उपकरण और विशेषज्ञों से दैनिक कमेंट्री की पहचान करने में मदद होगी।


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